उच्च पादपों में प्रकाश संश्लेषण

 रासायनिक प्रकाशहीन अभिक्रिया या ब्लैकमैन अभिक्रिया (PCR चक्र)

ATP और NADPH का उपयोग प्रकाश संश्लेषण की अप्रकाशीय अभिक्रिया में होता है तथा O2 क्लोरोप्लास्ट के बाहर विसरित होता है। यह अभिक्रिया प्रकाश पर निर्भर करती है और प्रकाश की अनुपस्थिति में यह हरितलवक के स्ट्रोमा भाग में सम्पन्न होती है।


मैल्विन केल्विन ने इसकी खोज की और इसे केल्विन चक्र नाम से जाना गया I

इन्होंने पता लगाया कि CO2 योगिकीकरण में पहला उत्पाद एक 3 कार्बन वाला कार्बनिक अम्ल (PGA) था |

प्रकाशहीन अभिक्रिया में पौधे में कार्बन योगिकीकरण निम्न तीन प्रकार से होता है :


1-केल्विन चक्र या केल्विन- बेन्सन चक्र

2-टैच स्लैक चक्र या C4 पथ

3-कैम चक्र


1- केल्विन चक्र या केल्विन बेन्सन चक्र

एम० केल्विन, ए० बेन्सन तथा इनके सहकर्मियों ने ए

क कोशिकीय हरे शैवाल जिसका नाम कलोरेला था प्रयोग किया और लगाया कि यह एक चक्रीय क्रम में संचालित होता है इसमें RuBP पुनः उत्पादित होता है। वे पौधे जो प्रकाश संश्लेषण की क्रिया करते हैं उनमें केल्विन चक्र पाया जाता है चाहे उनका पथ C3 हो या C4 । यह प्रक्रिया तीन चरणों में होती है –


कार्बोक्सिलिकरण

रिडक्सन

रिजेनेरेशन

1- कार्बोक्सिलिकरण: इस चरण में RuBP कार्बोक्सिलेज द्वारा उत्प्रेरित होती है और 3PGA के दो अणु बनते हैं। RuBP को रूबिस्को या RuBP कार्बोक्सिलेस- ऑक्सीजिनेस कहते हैं।

2- रिडेक्सन: इनमें ग्लूकोज बनता है। CO2 के 6 अणु के यौगिकीकरण से ग्लूकोज का एक अणु बनता है।

3- रिजेनेरेशन : 3 फास्फोग्लिसरेल्डिहाइड एवं डाइहाइड्रोक्सिटोन सक्रिय रूप से क्रिया करते हैं व राइढयूलोज 1-5, डाइफॉस्फेट का पुनः निर्माण करते हैं। यह एक जटिल प्रक्रिया है।


केल्विन चक्र में CO2 के प्रवेश के लिए ATP के 3 अणु व NADPK के 2 अणुओं की जरूरत पड़ती है।



ब्लैकमैन द्वारा प्रतिपादित प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कारक


प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कारक –

1- प्रकाश

यह प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है इसके अन्तर्गत निम्न बिन्दुओं को समझने की आवश्यकता होती है-


(a) प्रकाश की तीव्रता: प्रातः काल प्रकाश की तीव्रता कम होती है। इस स्थिति में आपतित प्रकाश तथा CO2 के यौगिकीकरण की दर के बीच एक रेखीय सम्बन्ध होता है। प्रकाश की तव्रिता उच्च होने पर दर में कोई वृद्धि नही होती।


(b) प्रकाश की गुणवत्ता: दृश्य स्पेक्ट्रम में ही प्रकाश की क्रिया होती है। हरे रंग का तरंगदैर्ध्य सबसे कम होता है। लाल तरंगदैर्ध्य में अधिकांश पौधे अधिक प्रकाश संश्लेषण करते हैं।


(c) प्रकाश की अवधि: पौधों को प्रकाश संश्लेषण के लिए 10-12 घंटे के प्रकाश की आवश्यकता होती है।


2- कार्बन-डाई-ऑक्साइड की सान्द्रता

CO2 की सान्द्रता वायुमण्डल में बहुत कम है। 0.05% वृद्धि हो जाने के कारण CO2 के यौगिकीकरण दर में वृद्धि हो सकती है। परन्तु इससे अधिक मात्रा में हानिकारक सिद्ध हो सकती है।


3- ताप

प्रकाश संश्लेषण के लिए कई पौधों के इष्टतम ताप उनके अनुकूलतम आवास पर निर्भर करता है । उष्णकटिबन्धीय पौधों के लिए यह ताप उच्च होता है। वे पौधे जो समशीतोष्ण जलवायु में उगते हैं, उन्हें कम ताप की जरूरत होती है।


4- पत्ती की आन्तरिक संरचना

पत्ती पर पाए जाने वाले पर्णहरिम की संख्या एवं पत्नी पर रूध्रों की संख्या व रूध्रों के खुलने एवं बन्द होने की क्रियाविधि का प्रकाश संश्लेषण की दर पर प्रभाव पड़ता है।


5- पर्णहरिम

पत्ती पर उपस्थित पर्णहरिम की मात्रा प्रकाश – संश्लेषण पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालती है।




प्रकाश संश्लेषण का महत्व

1- भोजन सामग्री का उत्पादन : प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा केवल पौधे ही कार्बोहाइड्रेट बनाते हैं। इसी से वसा एवम प्रोटीन का निर्माण होता है। अत: भोजन सामग्री के उत्पादन में इसका अत्यधिक महत्व है।


2- वायुमण्डलीय नियन्त्रण एवं शुद्धिकरण : कार्बन डाईऑक्साइड गैस का वायुमण्डल में एकत्रित होने से मनुष्य व अन्य जीवों की मृत्यु हो जाएगी लेकिन प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में पौधों द्वारा CO2 गैस लगातार प्रयोग में आती है। इसी के साथ हरे पौधों द्वारा ऑक्सीजन का उत्पादन होता है। जो लगातार वायुमंडल में मिलती रहती है। अत: प्रकाश संश्लेषण द्वारा लगातार वायु का शुद्धिकरण होता रहता है।

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